Metaphysics Knowledge Pays Homage to Shri Sukhdev Singh

चटवाल गाँव में रहते थे वो, करते थे बहुत ही इमानदारी से व्यापार

सबकी मदद करने में सबसे आगे रहते थे वो यकीनन यारों के यार

हिमाचल के काँगड़ा की वादियों में थे उनका एक सुन्दर सा घर

जहाँ है बहुत ही शांति, सुनता है केवल कलकल की ध्वनि स्वर

उन्ही वादियों में बहुत ही जल्दी वो हो गए सदा के लिए विदा

उनकी सब करते हैं सिफत, सब थे उनके ऊपर फ़िदा

दूर कहीं गगन में किसी आकाश गंगा में इन्सान चला है जाता

जो रह जाते पीछे, वो करते फ़रियाद, उन्हें कुछ नहीं है भाता

करते हैं हम प्रार्थना उनका हो उत्थान और जनम हो शुद्ध

फिर से इस चक्र में न हो प्रवेश, हो जाएँ वो प्रबुद्ध मौनी बुद्ध

प्रभु उनकी धर्म पत्नी को दे हिम्मत और धैर्य से जीने की ताकत

नारी शक्ति बन के उभरें वो, गरिमा मई हो उनकी नजाकत

उनके माता पिता समझते हैं खुद को अभागा, उनको हो ज्ञान

के शरीर बदला है आत्मा नहीं, तब होगा पूर्ण आदर्श सम्मान

इस मौके पैर लें इक सीख जीवन है क्षण भंगुर, कल हमारी बारी

सतगुर कहते हैं अपने अन्दर झांको, क्या तुम्हारी पूरी है तेयारी

अगर आ जाये तुरंत बुलावा तो क्या चले जायोगे हँसते हँसते

अगर तुम हो तैयार तो तुम इस जगत में नहीं हो फंसते

सितारों के उस पार जहाँ और भी हैं, संत ऐसा हैं कहते

लेकिन सबसे आगे हैं जाना, जहाँ शिवा हैं रहते

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